28 नवंबर 2014

आज भी............

आज भी.……

तुम्हारा चेहरा ,
खिलखिलाता सा,
चहकता सा,
मेरे नयनों में बसा है। 

वह तुम्हारी बातें ,
जो कभी हंसाती ,
कभी रुलाती ,
मेरे कर्णों में गूंजती हैं। 

तुम्हारे स्पर्श के ,
एहसास की ,
भीनी - भीनी खुशबू ,
मेरे मन को महकाती है। 

स्मृतियों की वर्षा ,
पूर्णतयः सरोबार कर, 
तुम्हारी याद दिलाती है। 

स्वपन है , यह तो केवल,
परन्तु सच होने की उम्मीद में ,



आज भी……

मेरे हृदय में तुम्हारी छवि समाई हुई है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आभार है मेरा