03 जनवरी 2015

हे ! हिमालय तू महान है


ऊँची जिसकी शान है ,
दुनिया में जिसका मान है ,
सदियों से है जो खड़ा हुआ ,
दुश्मनों के सामने अड़ा हुआ ,
हे ! हिमालय तू महान  है। 

प्रकृति के कई  उपहार ,
फूलों की नई बहार ,
ज्ञान के असंख्य भण्डार ,
तुझ में समाये अपरम्पार ,
हे ! हिमालय तू महान  है। 

अशांत मन को शांति ,
निर्जन जीवन को कांति ,
गंगा के प्रवाह को संभालता ,
निस्वार्थ प्रेम उड़ेलता ,
हे ! हिमालय तू महान  है। 

गा न सके कोई तेरी गाथा ,
ईश्वर भी तेरी गोद में समाता ,
पर आज तू है चीखता ,
इंसान जो है तुझको चीरता , 
फिर भी तू है डटा हुआ ,
हे ! हिमालय तू महान  है। 

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आभार है मेरा